मोहब्बत की आख़िरी बाज़ी

मोहब्बत की आख़िरी बाज़ी
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पाँच साल पहले…
अर्णव राजदेव ने…
काव्या त्रिवेदी से कहा था—
“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”
लेकिन…
उसी रात…
वह गायब हो गया।

पाँच साल तक…
न कोई कॉल…
न कोई संदेश…
न कोई सुराग।
सबने मान लिया…
कि अर्णव अब इस दुनिया में नहीं है।
फिर…
एक बारिश भरी शाम…
काव्या की सगाई के दिन…
दरवाज़ा खुला।

भीड़ के बीच…
अर्णव खड़ा था।
चेहरे पर हल्की मुस्कान थी…
लेकिन…
आँखों में…
प्यार नहीं…
एक अधूरी लड़ाई दिखाई दे रही थी।
उसने धीरे से कहा—
“मैं तुम्हें लेने नहीं आया… मैं सच जीतने आया हूँ।”

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