Inspirational

आत्म-स्वीकार

आत्म-स्वीकार

पंद्रह साल पहले…एक फैसला लिया गया था।उस फैसले ने किसी की जान नहीं ली…लेकिन कई ज़िंदगियाँ अधूरी कर दीं। समय […]

दूसरी पहचान

दूसरी पहचान

अनामिका सक्सेना…पचास वर्ष की उम्र में…अपने ही घर में मेहमान जैसी महसूस करने लगी थी। बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त

मुस्कुराते चेहरे का अनकहा दर्द

मुस्कुराते चेहरे का अनकहा दर्द

हर सुबह…आर्यव…सबसे पहले मुस्कुराता था। ऑफिस में…दोस्तों के बीच…परिवार के सामने…हर जगह…उसके चेहरे पर…बस मुस्कान रहती थी।लोग कहते थे…“यार… इससे

खामोश ज़िंदगी का शोर

खामोश ज़िंदगी का शोर

हर सुबह…अद्वैत शर्मा…समय पर ऑफिस जाता था।सबको मुस्कुराकर मिलता था।हर किसी की मदद करता था।लोग कहते थे…“इससे खुश इंसान हमने

अधूरा इश्क़

अधूरा इश्क़

कॉलेज की लाइब्रेरी…जहाँ…एक किताब…दो हाथों ने…एक साथ उठाई। एक हाथ…अर्णव राजदान का।दूसरा…ईशिता सैनी का। एक छोटी-सी मुलाकात…धीरे-धीरे…दोस्ती में बदली।दोस्ती…मोहब्बत में।और…मोहब्बत…ज़िंदगी

वक्त की करवट

वक्त की करवट

अर्जुन सिंघल…शहर का सबसे सफल उद्योगपति।पैसा…नाम…शोहरत…सब कुछ उसके पास था।रिश्तेदार…दोस्त…और समाज…हर कोई उसके आसपास मंडराता था। लेकिन…एक रात…उसकी कंपनी पर

बस स्टॉप वाली मोहब्बत

बस स्टॉप वाली मोहब्बत

हर सुबह…ठीक आठ बजे…शहर के एक पुराने बस स्टॉप पर…दो अजनबी…बिना कुछ कहे…एक-दूसरे को देखते थे।ना कोई परिचय…ना कोई बातचीत…सिर्फ़

भरोसे की कीमत

भरोसे की कीमत

वीर प्रताप राठौर…एक ऐसा इंसान…जो रिश्तों को पैसे से ऊपर मानता था।उसका विश्वास था…कि सच्चे लोग कभी धोखा नहीं देते।लेकिन…एक

Film City के बाहर

Film City के बाहर

मुंबई…जहाँ हर सुबह…हजारों नए सपने जन्म लेते हैं…और हर शाम…सैकड़ों सपने टूट जाते हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर

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