रागिनी की आख़िरी आवाज़

रागिनी की आख़िरी आवाज़
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अहमदाबाद की रातें हमेशा रहस्यमयी रही हैं। दिन की हलचल के बाद जब शहर सो जाता है, तो पुरानी हवेलियों की दीवारें और Riverfront की ठंडी हवाएं कहानियाँ सुनाने लगती हैं।

उसी शहर में रहती थी प्रिया पुरोहित — एक प्रतिभाशाली गायिका, जिसकी आवाज़ सुनकर हजारों लोग भाव-विभोर हो जाते थे। स्टेज पर उसकी उपस्थिति जादू थी। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स, रेडियो हिट्स, और बड़े-बड़े लाइव शो। लेकिन सफलता की इस चमकदार सतह के नीचे एक अंधेरा राज़ छुपा था।

पिछले छह महीनों से, हर सफल शो के बाद प्रिया को एक अज्ञात नंबर से कॉल आता था। कॉल पर कोई बात नहीं होती — सिर्फ एक कोमल, परिचित सी आवाज़ धीरे से कहती:

“तुम्हारी आवाज़ बहुत खूबसूरत है… बिल्कुल उसकी तरह।”

शुरुआत में प्रिया ने इसे किसी जुनूनी प्रशंसक की हरकत समझा। लेकिन धीरे-धीरे घटनाएँ और भयावह होती गईं — घर के बाहर अजीब पदचिह्न, कमरे में अकेले बजता पियानो, और रिकॉर्डिंग सेशन्स में बैकग्राउंड में सुनाई देने वाली एक दूसरी लड़की की फुसफुसाती हुई आवाज़।

साउंड इंजीनियर ने हँसकर कहा था, “लगता है कोई तुम्हारे साथ डुएट करना चाहता है।”

लेकिन प्रिया जानती थी — यह कोई मजाक नहीं था। क्योंकि वह आवाज़ उसे बचपन से परिचित थी। एक ऐसी याद जो उसके परिवार ने हमेशा उसके लिए दबाकर रखी थी।

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