अधूरी निहारिका: अधूरी कामनाओं की कहानी (M)

आगे बढ़ने से पहले: इस कहानी में ऐसे विषय और भाषा-शैली हो सकती है जो हर पाठक के लिए सहज न हो। कृपया अपनी समझ और विवेक से आगे बढ़ें।
अधूरी निहारिका: अधूरी कामनाओं की कहानी (M)
Text size
👁 32,841 views

इंदौर की एक शांत लेकिन व्यस्त कॉलोनी, विजय नगर में स्थित एक मध्यम वर्गीय सोसाइटी में रहती थी निहारिका शर्मा। उम्र ३५ वर्ष, गोरा-चिट्टा रंग, घने काले लंबे बाल, और एक परिपक्व शरीर जो अभी भी अपनी जवानी की चमक नहीं खोया था। शादी को १२ साल हो चुके थे। उनके पति मोहित शर्मा, ४० वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, एक अच्छी आईटी कंपनी में काम करते थे। बाहर से देखने में उनका परिवार पूरी तरह सुखी और स्थापित दिखता था — दो प्यारे बच्चे (१० वर्षीय बेटा और ८ वर्षीय बेटी), बड़ा फ्लैट, और सुविधापूर्ण जीवन।

लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी।

मोहित पिछले कई वर्षों से शराब की गंभीर लत के शिकार हो चुके थे। ऑफिस से लौटते ही उनकी पहली मांग व्हिस्की की बोतल होती। वीकेंड उनके लिए “ड्रिंकिंग नाइट्स” थे। कई बार तो वे इतने नशे में घर आते कि सोफे पर ही बेहोश हो जाते। बेडरूम में उनका स्पर्श अब ठंडा और बेमानी हो चुका था। निहारिका की कामुक इच्छाएं, उनकी उम्र की प्यास, सब अधूरी और दबी हुई रह जातीं। रातों को अकेले बिस्तर पर लेटकर वह खुद को छूतीं और कल्पनाओं में खो जातीं।

निहारिका की छुपी प्यास - intro

आर्थिक तंगी भी बढ़ती जा रही थी। मोहित की सैलरी अच्छी थी, पर शराब, पार्टी और EMI ने सब कुछ निगल लिया था। निहारिका ने नौकरी ढूंढने की बहुत कोशिश की — ऑनलाइन काम, ट्यूशन, हैंडीक्राफ्ट — लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने घर के एक कमरे में छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू कर दिया — “निहारिका ब्यूटी पार्लर”। महिलाएं आतीं, फेशियल, थ्रेडिंग और वैक्सिंग करवातीं। लेकिन इस पार्लर के पीछे निहारिका की असली कहानी छिपी थी।

अब उनकी जिंदगी में कई पुरुष घुस आए थे, जो उनकी शारीरिक और मानसिक प्यास बुझाते थे।

जब बच्चे स्कूल या खेलने चले जाते, मोहित ऑफिस या पीने में व्यस्त होते, या वीकेंड की शामें होतीं, निहारिका अपना फोन उठातीं और किसी एक को बुला लेतीं। उनकी कहानी अब सिर्फ एक असंतुष्ट गृहिणी की नहीं, बल्कि अपनी छुपी हुई कामुकता को जीने वाली एक औरत की थी।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top