अपनी दादी की मृत्यु के बाद 36 वर्षीय ध्रुव कपूर पत्नी अन्वी के साथ पहाड़ी कस्बे के लगभग सौ साल पुराने कपूर बंगले को बेचने लौटता है। डाइनिंग हॉल की पीतल की नौकर-घंटी की तारें चालीस साल पहले काटी जा चुकी हैं। पहली रात ठीक 2:16 पर वह दो छोटी और एक लंबी बजती है। रजिस्टर में इस क्रम के आगे लिखा है—ऊपर मत आना। उसी रात ऊपर से दूसरा क्रम आता है—तीन छोटी, दो लंबी। दादी की डायरी में उसी क्रम के आगे केवल एक शब्द है—भागो। ध्रुव इसे मौत का समय मानता है। असल में 2:16 वह मिनट था जब बंगले की बिजली ट्रिप हुई थी, और दोनों बहनें एक-दूसरे को बचाने का संकेत भेज रही थीं।
All Chapters
- अध्याय 1 – पुराने बंगले की घंटी
- अध्याय 2 – तार चालीस साल पहले काटा गया था
- अध्याय 3 – दो छोटी, एक लंबी
- अध्याय 4 – लीला कौन थी?
- अध्याय 5 – 2:16 मौत का समय नहीं था
- अध्याय 6 – तीन छोटी, दो लंबी
- अध्याय 7 – धुएँ वाली रात
- अध्याय 8 – गलत सीढ़ी
- अध्याय 9 – दीवार के पीछे दो छोटी घंटियाँ
- अध्याय 10 – लीला उस रात मरी नहीं थी
- अध्याय 11 – चालीस साल के पत्र
- अध्याय 12 – आखिरी संदेश
