बारह साल पहले…
एक प्रतिष्ठित परिवार…
एक ही रात में बिखर गया।
एक हत्या…
एक कथित आत्महत्या…
और अदालत का अंतिम फैसला।
फाइल बंद हो गई…
लोग आगे बढ़ गए…
लेकिन…
उस रात की कुछ आवाज़ें…
आज भी खामोश नहीं हुई थीं।
बारह साल बाद…
खोजी पत्रकार आर्यमान राठौर को…
एक पुराना डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर मिलता है।
उसमें कैद थी…
एक ऐसी बातचीत…
जो कभी पुलिस की केस डायरी तक नहीं पहुँची।
एक ऐसी आवाज़…
जो अगर उस समय सुनी जाती…
तो शायद…
एक निर्दोष की ज़िंदगी कभी बर्बाद नहीं होती।
अब…
आर्यमान तय करता है…
कि वह उस बंद फाइल को फिर से खोलेगा।
लेकिन…
जैसे-जैसे वह सच के करीब पहुँचता है…
वैसे-वैसे…
लोग गायब होने लगते हैं…
पुराने गवाह मुकरने लगते हैं…
और कोई…
हर कीमत पर…
उस रिकॉर्डिंग को हमेशा के लिए मिटाना चाहता है।
अब सवाल था…
क्या यह रिकॉर्डिंग…
सच का आख़िरी सबूत थी…
या…
किसी नई साजिश की शुरुआत?
