खामोश सौगात

खामोश सौगात
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उदयगढ़ की पहाड़ियों के बीच स्थित व्यास हवेली वर्षों से शहर की सबसे प्रतिष्ठित हवेली मानी जाती थी।
हवेली के मुखिया महेंद्र व्यास के अस्सीवें जन्मदिन पर पूरा परिवार वर्षों बाद एक साथ इकट्ठा हुआ था।
जश्न खत्म हुआ…
रात बीत गई…
लेकिन अगली सुबह…
हवेली का माहौल बदल चुका था।
हर कमरे के बाहर…
एक बंद उपहार रखा था।

पहले सभी ने इसे जन्मदिन का सरप्राइज़ समझा।
लेकिन…
जैसे-जैसे डिब्बे खुलते गए…
परिवार के चेहरों का रंग उड़ता गया।
हर वस्तु…
किसी ऐसे रहस्य से जुड़ी थी…
जिसके बारे में केवल वही व्यक्ति जानता था जिसने उसे छिपाया था।

और फिर…
हवेली के पुराने स्पीकर अचानक अपने आप चालू हुए।
एक बदली हुई आवाज़ गूँजी—
“बीस साल पहले जो सच तुम सबने मिलकर दफनाया था… अब हर सौगात उसे बाहर लाएगी।”

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