दिल की ईएमआई (M)

दिल की ईएमआई (M)
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दिल्ली की चकाचौंध भरी रोशनी में, 12वें तल्ले के एक छोटे से 2BHK फ्लैट में राहुल शर्मा अपनी पत्नी नेहा को कसकर बांहों में लिए हुए थे। रात के 11:30 बजे थे। आरव सो चुका था। कमरे में सिर्फ मंद पीली बेडसाइड लैंप की रोशनी थी और हल्का-हल्का मोबाइल से बजता पुराना गाना – “तुम ही हो… तुम ही हो…” नेहा की सांसें राहुल की छाती से टकरा रही थीं। उनकी उंगलियां राहुल की पीठ पर धीरे-धीरे नाखून गड़ा रही थीं, जैसे कह रही हों – “आज बहुत तनाव में हो ना?”
राहुल ने नेहा को और करीब खींचा। उनकी सैलरी 80 हजार थी, लेकिन हर महीने 30 हजार ईएमआई, 15 हजार कार की किस्त, आरव की स्कूल फीस, क्रेडिट कार्ड का बिल… सब कुछ चुपके से उनकी गर्दन पर चाकू की तरह चला जा रहा था। फिर भी इस वक्त सब भूलकर उन्होंने नेहा के होंठों को चूमा। गहरा, भूखा, जैसे पिछले कई दिनों की थकान निकाल रहे हों। नेहा की साड़ी का पल्लू सरक गया। राहुल की उंगलियां उनकी कमर पर घूम रही थीं। नेहा ने आह भरकर कहा, “राहुल… आज कुछ अलग करो… मुझे लगता है जैसे हम दोनों किसी फैंटसी में खो जाएं…”
और राहुल खो गए। आंखें बंद करते ही उनकी कल्पना में वे दोनों किसी सुनसान गोवा बीच पर थे। नेहा सफेद बिकनी में, लहरें उनके पैरों को छू रही थीं। राहुल उन्हें रेत पर लिटाकर… (यह फैंटसी उनके अंदर की वो आग थी जो रोज की तंगदस्ती में दब जाती थी)। वास्तविकता में नेहा ने राहुल को अपने ऊपर खींच लिया। कमरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज और कभी-कभी दबी हुई कराह थी। उस रात वे दोनों पहली बार इतने जुनूनी थे, जैसे जानते हों कि कल कुछ बहुत बड़ा टूटने वाला है।
सुबह होते ही राहुल का फोन बज उठा। ऑफिस का ईमेल। विषय लाइन सिर्फ दो शब्द – “Urgent: Layoff Update”। राहुल का दिल जोर से धड़का। उन्होंने ईमेल नहीं खोला। बस फोन साइलेंट करके नेहा को फिर से अपनी बांहों में खींच लिया। लेकिन मन में एक सवाल बार-बार घूम रहा था – “अगर आज नौकरी चली गई तो… ये फ्लैट, ये कार, आरव की पढ़ाई… और सबसे बड़ी बात – नेहा का ये प्यार… क्या टिक पाएगा?”
यह कहानी है एक साधारण सैलरीड आदमी की, जिसकी जिंदगी अचानक वित्तीय तूफान में फंस जाती है। परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाता है, प्यार की परीक्षा होती है, रातें डरावनी और रोमांचक हो जाती हैं, और राहुल की कल्पना में वो फैंटसी दुनिया बार-बार आती है – जहां पैसे नहीं, सिर्फ नेहा के साथ अनलिमिटेड प्यार और सेंसुअल खुशियां हैं।
क्या राहुल इस तूफान में परिवार को संभाल पाएगा? क्या नेहा का प्यार इतना गहरा होगा कि कर्ज के बोझ में भी वे दोनों एक-दूसरे को संभाले रख सकें? क्या उनकी छुपी हुई फैंटसीज उन्हें ताकत देंगी या और ज्यादा तोड़ देंगी?
यह कहानी है उन लाखों भारतीय महिलाओं के लिए, जो हर महीने अपने पति की सैलरी देखकर हिसाब लगाती हैं, जो रात में पति को चुपके से रोते देखती हैं, फिर भी मुस्कुराकर उन्हें गले लगाती हैं। यह कहानी है प्यार की, परिवार की, जिंदगी की सच्ची लड़ाई की… और उन गर्म, सेंसुअल पलों की जो तनाव के बीच भी पति-पत्नी को जोड़े रखते हैं।

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