हर परिवार अपनी आने वाली पीढ़ियों को कुछ न कुछ विरासत में देता है।
किसी को जमीन मिलती है।
किसी को नाम मिलता है।
किसी को दौलत मिलती है।
लेकिन इस परिवार को विरासत में मिला था—एक झूठ।
वर्षों से जिस सम्मान, संपत्ति और पारिवारिक गर्व पर यह परिवार खड़ा था, उसकी नींव ही एक छिपे हुए धोखे पर रखी गई थी। जब पिता की मृत्यु के बाद पुराने कागज़, एक बंद संदूक और दादा के लिखे अधूरे खत सामने आते हैं, तो परिवार को एहसास होता है कि उनका अतीत वैसा नहीं था जैसा उन्हें बताया गया था।
अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि सच क्या है।
सवाल यह है कि क्या सच जानने के बाद रिश्ते बच पाएँगे?
