एक बारिश भरी शाम…
रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर पाँच पर…
विहान अरोड़ा की नज़र…
एक लड़की पर पड़ी।
वह अकेली थी…
भीगी हुई…
डरी हुई…
और बार-बार…
पीछे मुड़कर किसी को देख रही थी।
विहान ने उसकी मदद करनी चाही…
लेकिन…
ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले…
वह लड़की…
भीड़ में ऐसे गायब हो गई…
जैसे कभी वहाँ थी ही नहीं।
अगले दिन…
विहान को…
अपने बैग में…
एक पुरानी तस्वीर मिली।
तस्वीर में वही लड़की थी।
लेकिन…
उस तस्वीर के पीछे…
जो तारीख लिखी थी…
वह आज से बारह साल पुरानी थी।
यहीं से शुरू हुआ…
एक ऐसा सफर…
जहाँ हर जवाब…
एक नए सवाल को जन्म देता था।
क्या वह लड़की…
किसी अपराध की गवाह थी?
या…
खुद किसी साज़िश का हिस्सा?
