रहस्यमयी किताब

रहस्यमयी किताब
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पुराने शहर की…
एक भूली हुई लाइब्रेरी…
जहाँ वर्षों से…
कोई नहीं गया था।
धूल से ढकी…
टूटी हुई अलमारियों के बीच…
नक्ष अरोड़ा को…
एक काली चमड़े की किताब मिली।
उस पर…
न लेखक का नाम था…
न शीर्षक।
बस…
सुनहरे अक्षरों में…
एक चेतावनी लिखी थी—
“इस किताब को वही खोले… जो अपने अतीत का सामना करने की हिम्मत रखता हो।”

नक्ष ने…
जैसे ही पहला पन्ना खोला…
उसे लगा…
वह लाइब्रेरी में नहीं…
बल्कि…
अपने बचपन में खड़ा है।
वह…
अपनी भूली हुई यादें…
अपनी गलतियाँ…
और…
ऐसी घटनाएँ देख रहा था…
जिन्हें उसने कभी किसी को नहीं बताया था।
लेकिन…
जब भी कोई…
इस किताब का आख़िरी पन्ना खोलने की कोशिश करता…
वह पन्ना…
अपने आप बंद हो जाता।

कहा जाता था…
जो उस आख़िरी पन्ने का रहस्य जान ले…
उसकी पूरी ज़िंदगी बदल जाती है।

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