कुछ वादे वक्त से हार जाते हैं…
लेकिन दिल उनसे कभी हार नहीं मानता।
हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत गाँव धर्मकोट में रहने वाली अद्विका नेगी की जिंदगी पहाड़ों, देवदार के जंगलों और बादलों के बीच बीतती थी।
उसी गाँव में छुट्टियाँ बिताने आया था निरवान राठौड़।
दोनों की मुलाकात एक पहाड़ी रास्ते पर हुई।
धीरे-धीरे दोस्ती हुई…
और फिर वही दोस्ती जिंदगी का सबसे खूबसूरत रिश्ता बन गई।
विदा होने से पहले निरवान ने एक वादा किया—
“अगले साल पहली बर्फ गिरने से पहले मैं जरूर लौटूँगा।”
लेकिन वह कभी नहीं आया।
साल बीतते गए।
पहाड़ों पर हर साल बर्फ गिरी।
हर साल बारिश आई।
लेकिन अद्विका का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
गाँव वालों ने कहा—
“वो शहर वाला लड़का तुम्हें भूल चुका है।”
अद्विका ने भी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश की…
लेकिन पहाड़ों की हर सुबह उसे वही अधूरा वादा याद दिला देती।
आठ साल बाद…
एक पर्यटक के रूप में कोई फिर उसी गाँव में आया।
वह चेहरा जाना-पहचाना था…
लेकिन उसकी आँखों में ऐसी खामोशी थी जैसे उसने भी जिंदगी में बहुत कुछ खो दिया हो।
अब सवाल था—
क्या निरवान सच में अपना वादा भूल गया था?
या उसे लौटने से रोकने वाला कोई ऐसा सच था जिसे आज तक किसी ने नहीं जाना?
क्या पहाड़ों वाला अधूरा वादा आखिरकार पूरा होगा?
या यह प्रेम हमेशा यादों में ही जिंदा रहेगा?
All Chapters
- Chapter 1 – देवदारों की छाँव में पहली मुलाकात
- Chapter 2 – पहाड़ी रास्तों पर खिलती दोस्ती
- Chapter 3 – दिल की गहराइयों में उतरता प्यार
- Chapter 4 – विदाई की ठंडी हवाएँ और अधूरा वादा
- Chapter 5 – इंतज़ार की लंबी रातें और पहाड़ों की चुप्पी
- Chapter 6 – आठ साल बाद लौटती पुरानी यादें
- Chapter 7 – अपरिचित पर्यटक और जानी-पहचानी आँखें
- Chapter 8 – गलतफहमियों की परतें और छिपे सच
- Chapter 9 – टूटे दिलों का सामना और उम्मीद की किरण
- Chapter 10 – सच्चे वादों की पूर्ति और पहाड़ों का आशीर्वाद
