बंधन का श्राप

बंधन का श्राप
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कहते हैं…
हर राजवंश अपने साथ एक विरासत छोड़ता है।
लेकिन कुछ विरासतें दौलत नहीं…
श्राप होती हैं।

सदियों पहले अमरकोट के राजमहल में एक ऋषि ने क्रोधित होकर राजपरिवार को श्राप दिया था—
“इस वंश की हर राजकुमारी का विवाह उसकी इच्छा से नहीं… बल्कि नियति के सबसे कठिन बंधन से होगा।”
तब से हर पीढ़ी में वही इतिहास दोहराया जाता रहा।
अब बारी थी राजकुमारी रागिनी देवयानी की।

उसने हमेशा अपने सपनों के राजकुमार की कल्पना की थी।
लेकिन राजमहल की राजनीति, दरबार की साजिश और उसके पिता की मजबूरी ने उसकी शादी एक ऐसे युवक से तय कर दी…
जिसे पूरा राज्य भिखारी जनार्दन कहकर पुकारता था।
रागिनी ने इसे अपनी किस्मत की सबसे बड़ी सजा समझा।
लेकिन उसे नहीं पता था…
कि जनार्दन कोई साधारण भिखारी नहीं था।
उसके फटे हुए वस्त्रों के पीछे छुपा था एक ऐसा रहस्य…
जो पूरे राज्य की किस्मत बदल सकता था।

धीरे-धीरे रागिनी को एहसास होता है कि वह जिस इंसान को सबसे बड़ा अभिशाप समझ रही थी…
वही उसके जीवन का सबसे बड़ा वरदान है।
लेकिन श्राप अभी खत्म नहीं हुआ था।
क्योंकि राजमहल में कोई ऐसा था…
जो चाहता था कि यह बंधन कभी पूरा न हो।

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