शादी के केवल छह महीने बाद नव्या सक्सेना अपने ससुराल के पुराने property विवाद से दूर रहना चाहती है। एक रात वह सीढ़ियों के पास रुककर अपने ससुर ओमप्रकाश और बड़े बेटे विक्रम की बातचीत सुन लेती है—सुबह सच बताने की बात, बीस साल चुप रहने की थकान, और एक रात और सोचने की विनती। कुछ ही देर बाद मुख्य दरवाजा खुलता है, उसका पति रोहित अंदर आता है, आवाजें तेज होती हैं, और एक भारी आवाज के साथ ओमप्रकाश सीढ़ियों के नीचे घायल मिलते हैं। ऊपर landing पर तीन लोग खड़े हैं—विक्रम, अमन, और रोहित। कोई कुछ नहीं बोलता। पुलिस जब पूछती है कि क्या उसने किसी को धक्का देते देखा, नव्या केवल इतना कहती है—नहीं। यह technically सच है, पूरा सच नहीं। परिवार हादसे को छोटे बेटे अमन के झगड़े से जोड़ लेता है। नव्या जानती है कि उस रात सीढ़ियों पर अमन अकेला नहीं था। समस्या यह है कि पूरा सच बोलने से शक उसके अपने पति पर भी जाएगा, और चुप रहने से एक आधा सच घर की दीवारों में और बीस साल के लिए दब जाएगा।
All Chapters
- अध्याय 1 – बहू की गवाही
- अध्याय 2 – उस रात सीढ़ियों पर कौन था?
- अध्याय 3 – फटी हुई कमीज
- अध्याय 4 – सुबह पापा क्या बताने वाले थे?
- अध्याय 5 – बड़े बेटे का कर्ज
- अध्याय 6 – रोहित को पापा ने बुलाया था
- अध्याय 7 – इस घर में बुआ का भी हिस्सा है
- अध्याय 8 – बड़ी बहू का संदेश
- अध्याय 9 – मैंने पुलिस से पूरा सच नहीं कहा
- अध्याय 10 – किसी ने धक्का नहीं दिया था
- अध्याय 11 – पापा ने अस्पताल में गवाही दी थी
- अध्याय 12 – सच के पक्ष में
