काल्पनिक मध्य भारतीय क्षेत्र में बसा छोटा गाँव कालीसराय कभी घने जंगल और बड़े तालाब के लिए जाना जाता था।
गाँव से लगभग एक किलोमीटर दूर एक सूखा तालाब है।
तालाब के किनारे खड़ा है एक विशाल बरगद—लगभग 250 वर्ष पुराना।
गाँव वाले उसे कहते हैं—सन्नाटे का पेड़।
पुरानी कथा के अनुसार करीब सौ वर्ष पहले गाँव में एक परिवार रहता था जिसे बाकी लोग “बाहर वाला परिवार” कहते थे। उन पर चोरी, टोना और अनिष्ट के आरोप लगे। एक रात पूरा परिवार गायब हो गया। अगली सुबह उनके घर की चीज़ें वहीं थीं। लेकिन वे नहीं। कुछ दिनों बाद बरगद के नीचे उनकी माँ की चूड़ियाँ मिलीं।
तब से हर कुछ वर्षों में पेड़ किसी का नाम फुसफुसाता है। और वह व्यक्ति गायब हो जाता है। पुलिस records में पिछले 45 वर्षों में ऐसे 19 लोग दर्ज हैं। लेकिन गाँव वालों का दावा—संख्या इससे कहीं अधिक है। अजीब बात यह है कि अधिकांश गायब लोग किसी न किसी रूप में उस पुराने परिवार, जमीन, तालाब या गाँव की सामूहिक शर्म से जुड़े थे।
अब अनाहिता शहर से अपने पिता की मृत्यु के बाद पुश्तैनी जमीन के दस्तावेज़ निपटाने आई है। उसी रात उसका भाई गायब हो जाता है। वह इसे curse मानने से इनकार करती है। लेकिन जब उसे पता चलता है कि उसके पिता वर्षों से पेड़ की फुसफुसाहटों का एक निजी रिकॉर्ड रखते थे… मामला परिवार से जुड़ जाता है।
All Chapters
- अध्याय 1 – पेड़ ने उसका नाम लिया
- अध्याय 2 – नंगे पैरों के निशान
- अध्याय 3 – उन्नीस गायब लोग
- अध्याय 4 – पिता की गुप्त डायरी
- अध्याय 5 – शाखाओं में किसकी आवाज़ है?
- अध्याय 6 – पुराना बहिष्कृत परिवार
- अध्याय 7 – जो नाम पहले लिखे गए
- अध्याय 8 – तालाब के नीचे
- अध्याय 9 – राघव जिंदा है?
- अध्याय 10 – सन्नाटे का सौदा
- अध्याय 11 – इस बार मेरा नाम
- अध्याय 12 – सन्नाटे का पेड़
