खून का जिन्न

खून का जिन्न
Text size
👁 9,522 views
काल्पनिक शहर मेहराबाद के पुराने हिस्से में क़ाज़मी परिवार की हवेली लगभग 180 वर्ष पुरानी है। परिवार के भीतर पीढ़ियों से एक कथा चली आती है—किसी समय उनके पूर्वज हादी क़ाज़मी ने रेगिस्तान में एक ऐसी सत्ता को बुलाया था जो इंसानी इच्छा को वास्तविकता में बदल सकती थी। परिवार ने उसका नाम लेना बंद कर दिया। उसे केवल कहा जाता था—खून का जिन्न। कहा जाता है कि जिन्न का कोई स्थायी चेहरा नहीं। वह उसी व्यक्ति का रूप ले सकता है जिसे सामने वाला सबसे ज्यादा चाहता है… या सबसे ज्यादा खोने से डरता है। कभी मृत पिता। कभी पुराना प्रेम। कभी बच्चा। कभी स्वयं का दूसरा रूप। हर पीढ़ी में कोई न कोई क़ाज़मी परिवार का सदस्य उसके पास पहुँचा। और हर बार—एक इच्छा पूरी हुई। फिर… कुछ छिन गया। रूही इस पूरी कहानी को अंधविश्वास मानती थी। वह पेशे से forensic psychologist है और वर्षों से grief, hallucination और trauma के cases पर काम करती आई है। लेकिन पिता की diary मिलने के बाद उसकी अपनी childhood story टूटने लगती है। क्या उसकी जिंदगी बचने की कीमत सच में उसकी माँ थी? अगर हाँ… तो माँ मरी? गायब हुई? या जिन्न ने उसे ऐसी जगह बाँध दिया जहाँ से वह अब भी वापस आ सकती है? रहस्य तब और गहरा होता है जब परिवार का एक सदस्य, अयाज़ क़ाज़मी, अपने बेटे को बचाने के लिए जिन्न को फिर बुलाने की कोशिश करता है। अगली सुबह बच्चा सुरक्षित है। लेकिन… अयाज़ की पत्नी उसे पहचानती नहीं। वह कहती है—“मेरी शादी कभी हुई ही नहीं।” अब रूही को समझ आता है—जिन्न हमेशा जान नहीं लेता। कभी-कभी… वह इंसान की जिंदगी से उसका अर्थ छीनता है।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top