पंद्रह साल पहले…
एक चर्चित हत्या का मामला…
पूरे देश की सुर्खियाँ बना था।
अपराधी गिरफ्तार हुआ…
अदालत ने फैसला सुनाया…
और केस हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
लोग आगे बढ़ गए…
समय बीत गया…
लेकिन…
एक सवाल…
आज भी ज़िंदा था।
एक दिन…
खोजी पत्रकार समर्थ राठौर को…
एक बिना नाम वाला लिफाफा मिला।
उसके अंदर…
सिर्फ़ एक पुरानी तस्वीर…
एक टूटी हुई घड़ी…
और एक पर्ची थी।
उस पर लिखा था—
“जिसे तुम सच मानते हो… वह सिर्फ़ आधा सच है। सवाल अभी ज़िंदा है…”
उस दिन के बाद…
समर्थ की ज़िंदगी बदल गई।
पुराने गवाह…
एक-एक करके गायब होने लगे।
पुरानी फाइलें…
रहस्यमयी तरीके से नष्ट होने लगीं।
और…
कोई…
हर कीमत पर…
उस आख़िरी सवाल को…
हमेशा के लिए दफन करना चाहता था।
अब सवाल था…
क्या सचमुच गलत आदमी को सज़ा मिली थी…
या…
पंद्रह साल पहले…
पूरे शहर ने मिलकर…
एक झूठ को सच बना दिया था?
