छाया-त्रय : तीन सायों की वासना

आगे बढ़ने से पहले: इस कहानी में ऐसे विषय और भाषा-शैली हो सकती है जो हर पाठक के लिए सहज न हो। कृपया अपनी समझ और विवेक से आगे बढ़ें।
छाया-त्रय : तीन सायों की वासना
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बेंगलुरु… जहाँ IT की चमकती ऊँची इमारतों और बारिश की सड़कों के पीछे गहरे राज़ छुपे रहते हैं।

राधिका शर्मा — 32 वर्षीय सफल फैशन डिज़ाइनर — अपनी लग्जरी लाइफ और शादीशुदा रिश्ते के बीच फँसी हुई थी। उसका पति विक्रम, एक बड़े बिजनेसमैन, अक्सर बाहर रहता था। Emotional distance बढ़ती जा रही थी।

फिर एक दिन उसकी कॉलेज फ्रेंड नेहा — bold, free-spirited फोटोग्राफर — वापस आई।
और एक रहस्यमयी अजनबी आरव — charming architect लेकिन dangerous past वाला — ने उसकी दुनिया में एंट्री की।

एक passionate night ने तीनों को एक कामुक और खतरनाक जाल में बाँध दिया। लेकिन यह सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण नहीं था… यह पुराने राज़, blackmail, hidden crimes और बड़े conspiracy का जाल था।

राधिका को चुनना था — विश्वास, प्रतिशोध या अपनी आज़ादी।
छाया-त्रय : तीन सायों की वासना — बेंगलुरु की बारिश, नेनो प्रकाश और तीन छायाओं की कहानी।

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