ग्वालियर शहर…
जहाँ…
हर महीने…
एक नया नाम…
डर में जीने लगता था।
काली चिट्ठी…
कभी…
डाक से नहीं आती थी।
वह…
किसी बंद कमरे में…
किसी कार की सीट पर…
या…
किसी की मेज़ पर…
अपने आप मिल जाती थी।
कोई…
उसे रखते हुए…
कभी दिखाई नहीं दिया।
जब…
शहर के सबसे बड़े उद्योगपति को…
वही चिट्ठी मिलती है…
और…
चार दिन बाद…
वह गायब हो जाता है…
तो…
मामले की जांच…
एसीपी विहान शुक्ला को सौंपी जाती है।
उनके साथ…
खोजी पत्रकार ईरा भटनागर…
और…
फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अन्वी चौधरी…
इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं।
लेकिन…
जांच के दौरान…
एक दिन…
एसीपी विहान की मेज़ पर भी…
एक…
काली चिट्ठी…
रखी मिलती है।
