भोपाल…
जहाँ…
लगातार आ रहे…
रहस्यमयी पैकेजों ने…
पूरे शहर में…
दहशत फैला दी थी।
पुलिस…
हर पैकेज की…
फॉरेंसिक जांच करती…
लेकिन…
खून…
हर बार…
किसी अलग व्यक्ति का निकलता।
फिंगरप्रिंट नहीं…
डीएनए अधूरा…
कुरियर रिकॉर्ड नकली…
और…
भेजने वाले का…
कोई अस्तित्व नहीं।
मामले की जांच सौंपी जाती है…
एसीपी आर्यमान राठौर को।
उनके साथ…
फॉरेंसिक विशेषज्ञ…
डॉ. ईरा त्रिवेदी…
और…
साइबर विश्लेषक…
युवान सक्सेना…
इस रहस्य की परतें खोलना शुरू करते हैं।
लेकिन…
जैसे-जैसे…
पैकेज खुलते जाते हैं…
वैसे-वैसे…
पता चलता है…
कि…
ये पैकेज…
हत्या की चेतावनी नहीं…
बल्कि…
पच्चीस वर्ष पुराने…
एक सामूहिक अपराध की…
चार्जशीट हैं।
