काल्पनिक शहर वर्धनपुर अपनी प्रतिष्ठित पुरानी बस्तियों, उद्योगों और प्रभावशाली परिवारों के लिए जाना जाता था।
शहर में हर व्यक्ति… किसी न किसी दूसरे को जानता था।
इसलिए… प्रतिष्ठा केवल सामाजिक सम्मान नहीं… जीवन की मुद्रा थी।
इसी शहर में रहती है 35 वर्षीय चारुलता अरोड़ा।
एक सफल criminal defence advocate।
शांत।
तेज़।
अपने निजी जीवन को सार्वजनिक दुनिया से पूरी तरह अलग रखने वाली।
एक रात… उसे एक client से फोन आता है।
शहर के प्रसिद्ध कारोबारी दिव्यांश कोचर के घर एक दंडपत्र मिला है।
पत्र में उसके बीस वर्ष पुराने financial misconduct का विवरण है।
चारुलता इसे anonymous blackmail मानती है।
लेकिन… पत्र में लिखे कई तथ्य सच साबित होते हैं।
फिर दूसरा पत्र।
तीसरा।
चौथा।
और हर बार… किसी प्रभावशाली व्यक्ति का अतीत सार्वजनिक होने लगता है।
कुछ लोग गिरफ्तार होते हैं।
कुछ परिवार टूट जाते हैं।
कुछ पुराने पीड़ितों को वर्षों बाद न्याय मिलने की उम्मीद दिखाई देती है।
शहर के लोग दंडपत्र भेजने वाले के समर्थन में आने लगते हैं।
सोशल मीडिया पर लिखा जाने लगता है—
“जब कानून सो जाए… दंडपत्र जागता है।”
चारुलता इस सोच का विरोध करती है।
उसका कहना है—
“आरोप और फैसला एक चीज़ नहीं होते।”
फिर… सातवीं रात…
काला लिफाफा… उसके अपने दरवाज़े पर मिलता है।
उस पर लिखा है—
“अधिवक्ता चारुलता अरोड़ा के लिए।”
वह पत्र खोलती है।
अंदर लिखा है—
“नौ साल पहले तुमने एक निर्दोष आदमी को नहीं फँसाया था।
लेकिन तुम जानती थीं कि असली सबूत कहाँ है।
तुमने अपने client को बचाने के लिए चुप्पी चुनी।”
चारुलता का चेहरा उतर जाता है।
क्योंकि… यह बात… केवल तीन लोग जानते थे।
उनमें से… एक मर चुका है।
दूसरा जेल में है।
और तीसरी… वह खुद है।
उसी रात एक और संदेश आता है—
“अगला दंडपत्र सच नहीं होगा।
अगर उसे रोकना है… तो पहले अपना सच स्वीकार करो।”
मामले की जांच डीसीपी अभिनवेश राणा को मिलती है।
उनके साथ forensic document expert डॉ. समिशा दत्त, digital-evidence analyst युवान्शी मल्होत्रा और social psychologist डॉ. अर्नविका सेन जुड़ते हैं।
लेकिन जल्द ही… उन्हें एहसास होता है—
दंडपत्र केवल अपराधियों की सूची नहीं।
कोई… पूरे शहर की शर्म… डर… और छिपे हुए अपराधबोध का… एक विशाल नक्शा बना चुका है।
All Chapters
- अध्याय 1 — पहला दंडपत्र
- अध्याय 2 — शहर का पहला दोषी
- अध्याय 3 — जब सच वायरल हुआ
- अध्याय 4 — आधा सच
- अध्याय 5 — निर्दोष पर आरोप
- अध्याय 6 — चारुलता का पत्र
- अध्याय 7 — नौ साल पुराना केस
- अध्याय 8 — लेखक कौन है?
- अध्याय 9 — शहर की शर्म का नक्शा
- अध्याय 10 — अगला पत्र झूठा है
- अध्याय 11 — अंतिम दंडपत्र
- अध्याय 12 — रात का दंडपत्र
