अंधेरे का ताबीज़

अंधेरे का ताबीज़
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काल्पनिक महानगर अर्णवगढ़ में रहने वाला अद्वैत सेन 36 वर्षीय architectural photographer है।
उसका पूरा काम रोशनी और छाया पर आधारित है।
वह पुरानी इमारतों की ऐसी तस्वीरें खींचने के लिए जाना जाता है जिनमें shadows स्वयं कहानी जैसी दिखाई देती हैं।
उसे मृत्यु से असामान्य डर नहीं था।
लेकिन अपने पिता की कम उम्र में हुई मृत्यु के बाद वह हमेशा सोचता रहा—
“अगर इंसान को थोड़ा और समय मिल जाए तो कितनी चीज़ें ठीक की जा सकती हैं?”
फिर एक heritage assignment के दौरान उसे एक पुरानी हवेली के sealed कमरे में काले पत्थर और धातु से बना ताबीज़ मिलता है।
ताबीज़ पर कोई धार्मिक प्रतीक स्पष्ट नहीं।
सिर्फ़ एक वृत्त।
उसके भीतर एक काली आकृति।
और पीछे खुदे शब्द—
“मृत्यु से बचोगे।
प्रकाश से नहीं।”
हवेली का वृद्ध caretaker उसे छूते ही घबरा जाता है।
वह कहता है—
“इसे पहनना मत।”
अद्वैत पूछता है—“क्यों?”
वृद्ध व्यक्ति जवाब देता है—
“क्योंकि यह जान बचाता नहीं…
बस मरने की प्रक्रिया बदल देता है।”
अद्वैत बात को अंधविश्वास समझकर ताबीज़ अपने पास रख लेता है।
उसी रात दुर्घटना होती है।
और वह बच जाता है।
लेकिन उसके बाद…
हर बार जब उसे गंभीर खतरा होता है…
ताबीज़ सक्रिय होता है।
और उसके शरीर से कोई नया हिस्सा…
छाया में बदलने लगता है।

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