मौत की घंटी

मौत की घंटी
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पिता की मृत्यु के बाद अपने पैतृक गाँव देवगढ़ लौटे emergency physician अर्जुन को पता चलता है कि गाँव में आधी रात के बाद बजने वाली एक रहस्यमयी घंटी को मौत का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि तीन घंटियाँ बजने के बाद सूरज निकलने से पहले किसी की मृत्यु निश्चित है। लेकिन जब अर्जुन पहली घटना की जाँच करता है तो उसे पता चलता है कि घंटी बजने के काफी समय बाद तक मृत व्यक्ति को बचाया जा सकता था। पिता की डायरी में मिले एक वाक्य से उसे शक होता है कि पीढ़ियों से गाँव ने “मौत की घंटी” का अर्थ उल्टा समझा है—वह मृत्यु की घोषणा नहीं, शायद उसे रोकने की आखिरी चेतावनी है।

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