जिसे मैंने दफना दिया था

जिसे मैंने दफना दिया था
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कुछ राज़ ऐसे होते हैं जिन्हें इंसान मिटा नहीं सकता।
वह उन्हें छिपा सकता है…
भुलाने की कोशिश कर सकता है…
लेकिन दफन किया हुआ अतीत एक दिन वापस लौटता जरूर है।

विहान, एक सफल और शांत दिखने वाला इंसान, अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका है। लोगों को लगता है कि उसके पास सब कुछ है—नाम, पैसा और सम्मान।
लेकिन उसके भीतर एक ऐसा डर छिपा है जिसे वह वर्षों से दबाए बैठा है।

कई साल पहले एक अंधेरी रात में कुछ ऐसा हुआ था जिसे उसने हमेशा के लिए मिटा देने की कोशिश की।
उसने सोचा था कि वह राज़ उसी रात खत्म हो गया।
लेकिन एक दिन उसे एक अनजान संदेश मिलता है—
“जिसे तुमने दफना दिया था… वो अभी भी ज़िंदा है।”
इसके बाद उसकी जिंदगी में अजीब घटनाएँ शुरू हो जाती हैं।
पुरानी आवाज़ें वापस आने लगती हैं।
वही जगह, वही रात और वही चेहरा बार-बार उसके सामने आने लगता है।

क्या उसका अतीत सचमुच लौट आया है?
या कोई उसके अपराधबोध को हथियार बनाकर उसके साथ खेल रहा है?

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