सात साल पहले काव्या अचानक गायब हो गई थी। बिना किसी अलविदा के। बिना किसी वजह के। बिना यह बताए कि वह किस दर्द, डर या सच से भाग रही थी।
उसके जाने के बाद अर्णव की दुनिया वहीं रुक गई। उसने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन हर रिश्ता, हर मुस्कान और हर सपना काव्या की यादों के सामने अधूरा पड़ गया।
अब सात साल बाद काव्या फिर लौट आई है। लेकिन वह पहले जैसी नहीं है। उसकी आँखों में प्यार भी है, पछतावा भी और एक ऐसा डर भी जिसे वह किसी से कह नहीं पा रही।
अर्णव जानना चाहता है कि वह गई क्यों थी। काव्या सच बताना चाहती है, लेकिन हर सच किसी न किसी रिश्ते को तोड़ सकता है।
क्या सात साल पुराना प्यार फिर से जिंदा हो पाएगा? या काव्या की वापसी उस राज़ की शुरुआत है, जिसे जानकर अर्णव की पूरी जिंदगी बदल जाएगी?
