मालवा के एक छोटे से गाँव में स्थित राजमहल हवेली… जहाँ परिवार की पुरानी रसोई तीन दशकों से ताले में बंद थी। परिवार का नियम था—
“रसोई कभी मत खोलना…”
कोई कारण कभी नहीं बताया गया। लेकिन परिवार के मुखिया जगतसिंह राठौड़ की मृत्यु के बाद हर रात रसोई की घड़ी अपने आप उल्टी चलने लगी। घड़ी के साथ परिवार के सदस्य ऐसी बातें याद करने लगे जो उन्होंने वर्षों पहले भुला दी थीं। किसी को एक चीख याद आई। किसी को जलते चूल्हे की गंध। किसी को एक महिला की आख़िरी पुकार।
जब रसोई की दीवार के पीछे एक महिला का कंकाल बरामद होता है तो जांच की जिम्मेदारी एसीपी अथर्व चौहान को सौंपी जाती है। उनके साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ईरा सक्सेना और घड़ी विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अन्वी त्रिपाठी उस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं जहाँ हर टिक-टिक एक पुराने अपराध की गवाही बन चुकी थी।
