जयपुर की…
प्रतिष्ठित…
राठौड़ हवेली…
जहाँ…
तीन पीढ़ियों से…
एक मुकदमे का नाम लेना भी…
मना था।
तीस वर्ष पहले…
परिवार के बड़े बेटे…
अभिमन्यु राठौड़…
की हत्या का मामला…
अचानक बंद हो गया था।
फाइल…
गायब हो गई।
गवाह…
मुकर गए।
और…
अदालत ने…
सबूतों के अभाव में…
मामला समाप्त कर दिया।
लेकिन…
अब…
देश की उच्च अदालत…
उसी मुकदमे को…
फिर से खोलती है।
मामले की पैरवी करती हैं…
अधिवक्ता ईरा त्रिवेदी…
जांच की निगरानी करते हैं…
डीसीपी अथर्व चौहान…
और…
फॉरेंसिक विशेषज्ञ…
डॉ. अन्वी सक्सेना…
तीस वर्ष पुराने हर सबूत को…
दोबारा जांचते हैं।
लेकिन…
जैसे-जैसे…
हर सुनवाई आगे बढ़ती है…
वैसे-वैसे…
परिवार का…
हर सदस्य…
कटघरे में खड़ा दिखाई देने लगता है।
