भाई की मृत्यु के बाद insomnia और anxiety से जूझ रहा निखिल अपने परिवार के साथ शहर के बाहरी हिस्से के एक पुराने स्वतंत्र घर में रहने आता है, जहाँ हर रात ठीक 3:14 बजे उसे किसी के आने की आहट सुनाई देती है। पत्नी अदिति इसे grief और वहम मानती है, लेकिन जब सात वर्षीय बेटा आरव भी रात वाले आदमी की बात करता है और कहता है कि उसका चेहरा पापा जैसा है—तो वास्तविकता और paranoia की सीमा टूटने लगती है। घर में होने वाली हर असंभव घटना निखिल का वहम नहीं थी। मगर जिस सच से वे घटनाएँ जुड़ी हैं, वह उसके सबसे डरावने शक से भी अधिक व्यक्तिगत है।
All Chapters
- अध्याय 1 – रात में कोई आता है
- अध्याय 2 – दूसरे पापा
- अध्याय 3 – Camera में दो निखिल
- अध्याय 4 – शायद मुझे वहम हो रहा है
- अध्याय 5 – राहुल को पहले से पता था
- अध्याय 6 – 3:14
- अध्याय 7 – ये इस घर में पहले भी हुआ है
- अध्याय 8 – वो मेरी तरह क्यों बन रहा है?
- अध्याय 9 – घर में असली निखिल कौन है?
- अध्याय 10 – राहुल की आखिरी रात
- अध्याय 11 – वहम किसे था?
- अध्याय 12 – मुझे पता है मैं कौन हूँ
