एक गंभीर रोड एक्सीडेंट के छह महीने बाद अद्वैत मल्होत्रा अपनी पत्नी सिया के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा है—सुबह की कॉफी, छोटी-छोटी बहसें, रात की फिल्में। लेकिन उसकी बहन और बाकी दुनिया का दावा है कि सिया उसी एक्सीडेंट में मर चुकी थी। अद्वैत को लगता है शायद ट्रॉमा ने उसके दिमाग में सिया का भ्रम पैदा कर दिया है, जब तक उसकी “हैलुसिनेशन्स” ऐसी बातें बताना शुरू नहीं करतीं जिन्हें वह स्वयं नहीं जानता। जैसे-जैसे यादें, तस्वीरें, सीसीटीवी और एक्सीडेंट रिकॉर्ड एक-दूसरे का विरोध करने लगते हैं, असली सवाल यह नहीं रह जाता कि सिया जीवित है या मृत—बल्कि यह कि उसकी जिंदगी में कौन-सी घटनाएँ वास्तव में हुई थीं और कौन-सी किसी टूटे हुए मन ने उसे सच मानना सिखा दिया।
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- अध्याय 1 – तुम उसे देख क्यों नहीं रही?
- अध्याय 2 – वो मेरे साथ रहती है
- अध्याय 3 – इस घर में सिर्फ एक आदमी रहता है
- अध्याय 4 – जो चीज़ें मैंने नहीं कीं
- अध्याय 5 – मेरी यादों में क्या गलत है?
- अध्याय 6 – सिया को वो बात कैसे पता थी?
- अध्याय 7 – Camera में कौन था?
- अध्याय 8 – उस रात car कौन चला रहा था?
- अध्याय 9 – ये पहले भी हो चुका है
- अध्याय 10 – मेरी जिंदगी के छह महीने कहाँ हैं?
- अध्याय 11 – भ्रम किसका था?
- अध्याय 12 – जो सच बचा रहा
