भूलक्कड़ जासूस

भूलक्कड़ जासूस
Text size
👁 8,839 views
भोपाल के पुराने शहर में… एक छोटी-सी निजी जासूसी एजेंसी थी— “बख्शी इन्वेस्टिगेशन्स”। उसका मालिक… विहान बख्शी… शहर के सबसे प्रतिभाशाली निजी जासूसों में गिना जाता था। उसकी observation इतनी तेज़ थी कि… किसी व्यक्ति के कपड़े… बोलने के अंदाज़… जूते… घड़ी… और हाथों को देखकर… वह कुछ ही मिनटों में… उसके बारे में कई बातें समझ लेता। लेकिन विहान की एक विचित्र समस्या थी— वह रोज़मर्रा की महत्वपूर्ण बातें अक्सर भूल जाता था। कभी… किसी संदिग्ध का नाम। कभी… अपना मोबाइल कहाँ रखा। कभी… पुलिस अधिकारी को मिलने का समय। और कभी… वह सुराग… जिसके कारण पूरा केस हल हो सकता था। इसीलिए उसकी सहयोगी काव्या नायर उसकी हर जांच रिकॉर्ड करती थी। विहान स्वयं भी… लाल डायरी में… हर महत्वपूर्ण तथ्य लिखता था। फिर… शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति रजत सोमानी अपने निजी अध्ययन-कक्ष में मृत मिलते हैं। कमरा अंदर से बंद था। खिड़कियाँ बंद। सुरक्षा कैमरों में… कोई अंदर आता दिखाई नहीं देता। और… टेबल पर रखे कागज़ पर केवल एक वाक्य लिखा था— “जासूस को बुलाओ… वह मुझे पहले से जानता है।” पुलिस विहान को बुलाती है। लेकिन… विहान दावा करता है— उसने रजत सोमानी को जिंदगी में कभी नहीं देखा। फिर… रजत के फोन से एक वीडियो मिलता है। वीडियो केवल… तीन दिन पुराना है। उसमें… रजत के सामने बैठा व्यक्ति… कोई और नहीं… विहान खुद है। वीडियो में विहान कह रहा है— “अगर अगले तीन दिनों में आपकी हत्या हुई… तो मुझे पता है कातिल कौन होगा।” कमरे में सन्नाटा छा जाता है। क्योंकि… विहान को… उस मुलाकात की… एक भी बात याद नहीं।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top