Z+ सिक्योरिटी

Z+ सिक्योरिटी
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रात के…
दो बजकर सत्रह मिनट हुए थे।
राजधानी के सबसे सुरक्षित सरकारी आवास के बाहर…
अचानक दर्जनों काली गाड़ियाँ आकर रुकीं।
हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने…
कुछ ही मिनटों में…
पूरे परिसर को अपने घेरे में ले लिया।

लोकप्रिय जननेता…
अभिराज वर्धन…
नींद से उठाकर…
बैठक कक्ष में लाए गए।
उनके सामने…
राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग की एक बंद फ़ाइल रखी गई।
फ़ाइल के ऊपर…
लाल अक्षरों में लिखा था—
“अत्यंत गोपनीय—संभावित खतरा”

अभिराज ने फ़ाइल खोलनी चाही…
लेकिन सुरक्षा प्रमुख ने उनका हाथ रोक दिया।
उसने गंभीर आवाज़ में कहा—
“आज से आपको Z+ सुरक्षा दी जा रही है।”
अभिराज ने पूछा—
“खतरा किससे है?”
सुरक्षा प्रमुख ने कुछ क्षण उनकी ओर देखा…
और धीमे स्वर में उत्तर दिया—
“यही हम नहीं जानते।”
तभी अभिराज के निजी फोन पर…
एक अनजान नंबर से संदेश आया—
“सुरक्षा बढ़ा लो… क्योंकि तुम्हारा कातिल पहले ही तुम्हारे घर में प्रवेश कर चुका है।”

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