दादा जी की…
तेरहवीं भी पूरी नहीं हुई थी…
कि घर के बाहर…
एक काली कार आकर रुकी।
उसमें से…
सफेद बालों वाला…
एक बुज़ुर्ग वकील उतरा।
उसके हाथ में…
एक पुरानी चमड़े की फ़ाइल थी।
उसने…
पूरे परिवार के सामने…
सिर्फ़ एक वाक्य कहा—
“पैंतीस साल पहले… हरिनारायण सिंह ने एक करार किया था। अब उसे पूरा करने का समय आ गया है।”
घर में…
सन्नाटा छा गया।
क्योंकि…
परिवार में…
किसी ने भी…
ऐसे किसी करार का नाम…
पहले कभी नहीं सुना था।
लेकिन…
उस फ़ाइल के खुलते ही…
पूरे परिवार की नींव…
हिल गई।
All Chapters
- अध्याय 1 — वकील की दस्तक
- अध्याय 2 — पुरानी फ़ाइल
- अध्याय 3 — करार की पहली शर्त
- अध्याय 4 — दादा का छिपा हुआ सच
- अध्याय 5 — विरासत पर सवाल
- अध्याय 6 — झूठ की दीवार
- अध्याय 7 — खोया हुआ उत्तराधिकारी
- अध्याय 8 — अधूरी गवाही
- अध्याय 9 — असली मकसद
- अध्याय 10 — करार का आख़िरी पन्ना
- अध्याय 11 — दादा का बलिदान
- अध्याय 12 — पुराना करार
