यह कथा एक ऐसे युवक की है जिसका नाम राजू था। गरीबी, हताशा और परिस्थितियों की कठोरता ने उसे अपराध के अंधेरे मार्ग पर धकेल दिया। रात के साये में छिपकर वह दूसरों की संपत्ति चुराता रहा, यह मानकर कि जीवन की विषमताएँ उसे यह अधिकार देती हैं। किंतु एक अप्रत्याशित मुलाकात, एक वृद्ध शिक्षक की करुणा और स्वयं के अंतर्मन से उठने वाला संघर्ष ने उसके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी।
यह कहानी मात्र चोरी और पकड़े जाने की घटनाओं का वर्णन नहीं है; यह आत्म-परिवर्तन, पश्चाताप, नैतिक जागरण और मानवीय मूल्यों की पुनःस्थापना की गहन यात्रा है। यह दर्शाती है कि मनुष्य कितना भी नीचे गिर जाए, यदि उसमें सच्ची इच्छा और मार्गदर्शन हो, तो वह पुनः सम्मानजनक जीवन की ओर लौट सकता है।
