इच्छाओं का कुआँ

इच्छाओं का कुआँ
Text size
👁 14,235 views

अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे सूर्यगढ़ गाँव में एक ऐसा कुआँ था जिसके पास सूर्यास्त के बाद कोई नहीं जाता था। बुज़ुर्ग कहते थे— “यह साधारण कुआँ नहीं… इच्छाओं का कुआँ है।” कहानी थी कि सैकड़ों साल पहले एक साधु ने वहाँ तपस्या की थी। उसके बाद जो भी सच्चे मन से इच्छा माँगता, उसे वह मिल जाती।

लेकिन कुछ महीनों बाद उसकी ज़िंदगी से कुछ अनमोल हमेशा के लिए गायब हो जाता। लोग इसे अंधविश्वास समझते रहे। जब तक एक रात अदिति ने उस कुएँ में सिक्का डालकर सिर्फ़ इतना नहीं कहा— “भगवान… मेरी ज़िंदगी बदल दीजिए।” अगली सुबह उसकी हर इच्छा पूरी होने लगी। लेकिन हर खुशी के साथ कोई अपना उससे दूर होता चला गया।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top