दादाजी की वसीयत…
पढ़ी जा रही थी।
पूरा परिवार…
एक ही कमरे में बैठा था।
तभी…
वकील ने…
पुरानी फ़ाइल से…
एक पीला पड़ा हुआ…
शादी का प्रमाणपत्र निकाला।
कमरे में…
सन्नाटा छा गया।
क्योंकि…
उस प्रमाणपत्र पर…
परिवार के एक ऐसे सदस्य का नाम था…
जिसकी…
कभी शादी हुई ही नहीं थी।
और…
उस शादी की तारीख़…
आज से…
तीस साल पुरानी थी।
वसीयत का अगला वाक्य था—
“जब तक इस शादी का सच सामने नहीं आएगा… तब तक विरासत का एक भी हिस्सा किसी को नहीं मिलेगा।”
All Chapters
- अध्याय 1 — वसीयत का झटका
- अध्याय 2 — शादी का प्रमाणपत्र
- अध्याय 3 — छिपी हुई दुल्हन
- अध्याय 4 — तीस साल पुराना झूठ
- अध्याय 5 — विरासत पर सवाल
- अध्याय 6 — अधूरी गवाही
- अध्याय 7 — खोया हुआ उत्तराधिकारी
- अध्याय 8 — पारिवारिक साज़िश
- अध्याय 9 — असली वारिस
- अध्याय 10 — शादी का सच
- अध्याय 11 — अंतिम फैसला
- अध्याय 12 — गुप्त शादी
