शहर में…
आठ महीनों के भीतर…
आठ हत्याएँ हो चुकी थीं।
हर बार…
लाश के पास…
एक सफेद मुखौटा रखा मिलता था।
ना उंगलियों के निशान…
ना कोई गवाह…
ना कोई कैमरा…
बस…
एक मुस्कुराता हुआ मुखौटा।
उसी शहर में…
रुद्रांश देव…
हर किसी की मदद करने वाला…
सम्मानित समाजसेवी था।
कोई सोच भी नहीं सकता था…
कि…
शहर का सबसे भरोसेमंद चेहरा…
सबसे बड़ा रहस्य भी छिपा सकता है।
