साल 1999…
शहर के सबसे प्रतिष्ठित परिवार “प्रताप निवास” में एक ऐसी रात आई…
जिसने पूरे शहर को हिला दिया।
परिवार के बड़े बेटे…
विक्रम प्रताप…
अपने ही अध्ययन कक्ष में मृत पाए गए।
कमरा अंदर से बंद था।
न कोई हथियार मिला…
न कोई गवाह।
छह महीने तक पुलिस ने जाँच की।
फिर…
“सबूतों के अभाव” में…
केस बंद कर दिया गया।
समय बीतता गया।
बच्चे बड़े हो गए।
नई पीढ़ी ने पुराने दर्द को इतिहास समझ लिया।
लेकिन…
सन् 2024 में…
पुराने रिकॉर्ड डिजिटाइज़ करते समय…
एक ऐसी फाइल मिली…
जिस पर लाल अक्षरों में लिखा था—
“यह केस कभी बंद नहीं हुआ…”
उसी दिन…
पच्चीस साल पुराना सच…
फिर से साँस लेने लगा।
