दिल्ली की तिहाड़ जेल में…
देश का सबसे चर्चित अपराधी राघव चौहान अपनी आख़िरी रात गिन रहा था।
दस हत्याओं का दोषी…
अदालत से मृत्युदंड पा चुका था।
पूरा देश उसकी फाँसी का इंतज़ार कर रहा था।
लेकिन…
फाँसी से पहले उसने एक ऐसी बात कही…
जिसने पूरे न्याय तंत्र को हिला दिया।
उसी रात…
शहर में ग्यारहवीं हत्या हुई।
हत्या का तरीका…
सबूत…
और अपराधी की पहचान…
सब कुछ पुराने मामलों जैसा था।
क्या अदालत ने गलत आदमी को सज़ा दी?
या…
कोई ऐसा खिलाड़ी सामने आया था…
जो न्याय व्यवस्था के सबसे बड़े भरोसे को तोड़ने वाला था?
