दादाजी के निधन के बाद शर्मा परिवार को शहर के बाहरी हिस्से में बना करीब सौ साल पुराना एक विशाल मकान विरासत में मिला। वर्षों से वह मकान बंद पड़ा था। जब पूरा परिवार वहाँ रहने पहुँचा तो पहली ही रात ऊपरी मंज़िल से कदमों की आवाज़ आने लगी। कभी दीवारों के पीछे कुछ खिसकने की आवाज़, तो कभी आधी रात को पुराना दरवाज़ा अपने आप खुल जाता। परिवार ने सोचा मकान पुराना है इसलिए ऐसा होता होगा। लेकिन जब उन्होंने उसे बेचने का फैसला किया तो हर खरीदार किसी न किसी रहस्यमयी वजह से सौदा अधूरा छोड़कर भाग गया।
इसी दौरान एक पुरानी डायरी दीवार के भीतर छिपी मिली। उसमें लिखा था—
“यह मकान मत बेचना… क्योंकि इसकी दीवारों में सिर्फ़ ईंटें नहीं… एक ऐसा सच दफन है, जिसे बाहर आने में सौ साल लग गए।”
अब सवाल था—क्या उस मकान में कोई छिपा हुआ खज़ाना था या एक ऐसा अपराध जिसे पूरी दुनिया से छिपा दिया गया था?
All Chapters
- अध्याय 1 – पहली रात की कदमों की आवाज़
- अध्याय 2 – मकान की छिपी हुई आवाज़ें
- अध्याय 3 – डायरी का चेतावनी संदेश
- अध्याय 4 – रहस्यमयी आगंतुक का आगमन
- अध्याय 5 – दादी सावित्री की चुप्पी
- अध्याय 6 – इंस्पेक्टर की जांच शुरू
- अध्याय 7 – दीवार के भीतर का राज़
- अध्याय 8 – परिवार में संदेह की लहर
- अध्याय 9 – पुराने अपराध के टुकड़े जुड़ते हुए
- अध्याय 10 – विरासत का असली चेहरा
