उदयपुर की…
रुद्रगढ़ हवेली…
जहाँ…
राठौड़ परिवार…
देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर समूह का मालिक था।
परिवार के मुखिया…
जगतसिंह राठौड़…
अपनी अंतिम वसीयत तैयार कर रहे थे।
उसी दौरान…
कंपनी की…
अरबों रुपये की…
गोपनीय परियोजना…
प्रतिद्वंद्वी कंपनी तक पहुँच जाती है।
संदेह…
परिवार के बाहर नहीं…
बल्कि…
घर के अंदर…
उठता है।
जब…
सीसीटीवी फुटेज में…
दो पारिवारिक सदस्य…
रात के अंधेरे में…
दुश्मनों से मिलते दिखाई देते हैं…
तो…
जांच की जिम्मेदारी…
एसीपी अथर्व चौहान…
को मिलती है।
उनके साथ…
फॉरेंसिक ऑडिटर ईरा मेहता…
और…
क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अन्वी सक्सेना…
सिर्फ़ अपराध नहीं…
बल्कि…
हर रिश्ते की सच्चाई की जांच शुरू करते हैं।
लेकिन…
जैसे-जैसे…
जांच आगे बढ़ती है…
हर सदस्य…
किसी न किसी…
गुप्त गठबंधन का हिस्सा…
नज़र आने लगता है।
