भोपाल के बाहरी इलाके में…
बनी…
एक आधुनिक स्मार्ट हवेली…
आर्या रेसिडेंस…
जहाँ…
हर चीज़…
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नियंत्रित होती थी।
लाइट…
दरवाज़े…
कैमरे…
और…
पूरा वॉइस सिस्टम।
लेकिन…
पिछले तीन महीनों से…
हर रात…
2:22 बजे…
सिस्टम अपने आप सक्रिय हो जाता।
घर के हर स्पीकर से…
पुरानी बातचीत…
झगड़े…
रोना…
और…
माफी माँगने की आवाज़ें सुनाई देतीं।
परिवार का दावा था…
इनमें से कई बातें…
उन्होंने…
कभी रिकॉर्ड ही नहीं की थीं।
जब…
उसी रात…
परिवार के मुखिया…
रहस्यमय परिस्थितियों में…
कोमा में चले जाते हैं…
तो…
जांच की जिम्मेदारी मिलती है…
एसीपी अथर्व मेहता को।
उनके साथ…
साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ ईरा चौहान…
और…
क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अन्वी सक्सेना…
इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं।
लेकिन…
जैसे-जैसे…
पुरानी आवाज़ें…
सामने आती हैं…
उन्हें एहसास होता है…
कि…
घर में…
सबसे बड़ा दुश्मन…
कोई इंसान नहीं…
बल्कि…
हर सदस्य का…
अपना अपराधबोध है।
