उदयपुर के पास…
राजमहल हवेली…
जहाँ…
राठौड़ परिवार…
तीन पीढ़ियों बाद…
एक पारिवारिक दावत के लिए इकट्ठा हुआ था।
दावत का आयोजन…
परिवार के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य…
जगतसिंह राठौड़ ने किया था।
उनका कहना था…
कि…
यह…
शायद…
उनकी आख़िरी पारिवारिक दावत होगी।
लेकिन…
रात…
8:43 बजे…
पूरी हवेली अंधेरे में डूब जाती है।
जब…
बिजली लौटती है…
तो…
परिवार का सबसे छोटा बेटा…
युवान राठौड़…
अपनी कुर्सी से गायब होता है।
न कोई चीख…
न संघर्ष…
न खून का निशान।
सिर्फ़…
उसकी प्लेट पर…
एक काला गुलाब रखा होता है।
मामले की जांच…
एसीपी अथर्व चौहान को सौंपी जाती है।
उनके साथ…
फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ईरा सक्सेना…
और…
क्राइम साइकोलॉजिस्ट अन्वी मिश्रा…
हवेली के भीतर छिपे उस सच तक पहुँचने निकलते हैं…
जो…
पूरे परिवार की नींव हिला देता है।
All Chapters
- अध्याय 1 – आख़िरी निमंत्रण
- अध्याय 2 – अंधेरे के 37 सेकंड
- अध्याय 3 – खाली कुर्सी
- अध्याय 4 – काला गुलाब
- अध्याय 5 – विरासत का खेल
- अध्याय 6 – झूठे बयान
- अध्याय 7 – गुप्त सुरंग
- अध्याय 8 – परिवार का सबसे बड़ा झूठ
- अध्याय 9 – तीस साल पुराना अपराध
- अध्याय 10 – गायब सदस्य
- अध्याय 11 – दावत का असली उद्देश्य
- अध्याय 12 – आख़िरी दावत
