सितंबर 2026। 33 वर्षीय प्रॉपर्टी-डॉक्यूमेंट्री फ़ोटोग्राफ़र नील त्रिवेदी अपने नाना हरिशंकर जोशी की मृत्यु के बाद शहर के पुराने हिस्से में स्थित लगभग 75 वर्ष पुराना दो-मंज़िला किराये का मकान बेचने और संपत्ति निपटान में मदद करने आता है। मकान रजिस्ट्री पर जीवनभर हरिशंकर के एकल स्वामित्व में था; अब कानूनी वारिस उनके दो बच्चे हैं—बेटा विजय जोशी और बेटी शालिनी त्रिवेदी। नील स्वयं मालिक नहीं, नाना का पौत्र और दस्तावेज़ी गवाह है। परिवार का दावा है कि आख़िरी किरायेदार समीर वर्मा 4 अगस्त 2003 को ऊपरी मंज़िल पर ₹1,850 मासिक किराये पर आया और कुछ महीनों बाद घर छोड़ गया, जिसके बाद घर किसी को नहीं दिया गया। टाइमलाइन साफ़ है: 2003 में नील लगभग दस वर्ष का था; 2003 के अंत से सितंबर 2026 तक ठीक तेईस वर्ष के किराया-इंद्राज हैं, vacating date खाली है, और सबसे ताज़ा एंट्री इसी महीने की पहली तारीख की है। रहस्य तब गहराता है जब 2003 के टेनेंसी फ़ॉर्म पर लगी तस्वीर नील के वर्तमान चेहरे जैसी दिखती है—जबकि उस समय वह बच्चा था—और उसी रात ऊपर से पदचाप आकर मुख्य द्वार के बाहर ₹1,850 का लिफ़ाफ़ा छोड़ जाती है: “कमरा अभी खाली नहीं किया है।” असली सवाल यह नहीं कि किरायेदार गया कहाँ, बल्कि यह कि परिवार ने तेईस साल तक कागज़ों में उसे किरायेदार बनाए क्यों रखा।
All Chapters
- अध्याय 1 – घर का आख़िरी किरायेदार
- अध्याय 2 – तेईस साल से किराया कौन दे रहा है?
- अध्याय 3 – किरायेदार की तस्वीर में मेरा चेहरा
- अध्याय 4 – कमरा अभी खाली नहीं किया है
- अध्याय 5 – समीर वर्मा कौन था?
- अध्याय 6 – तस्वीर 2003 की नहीं थी
- अध्याय 7 – असली समीर इस आदमी जैसा नहीं दिखता
- अध्याय 8 – नानाजी ने किरायेदारी खत्म क्यों नहीं की?
- अध्याय 9 – किरायेदार हमारा कर्जदार नहीं था
- अध्याय 10 – समीर तेईस साल पहले मर चुका था
- अध्याय 11 – किराया नानाजी खुद भरते थे
- अध्याय 12 – आख़िरी महीने का किराया
