अभिशप्त हवेली

अभिशप्त हवेली
Text size
👁 18,295 views

उत्तर प्रदेश के एक सुनसान पहाड़ी क्षेत्र में, घने जंगलों और पुरानी किंवदंतियों से घिरी कालपी नामक छोटी सी जगह पर स्थित है — अभिशप्त हवेली। सन् १८५७ की क्रांति के बाद बनी यह विशाल इमारत एक समय स्थानीय जमींदार परिवार राठौरों की शान थी, लेकिन पिछले सत्तर वर्षों से यह लगभग वीरान पड़ी है। स्थानीय लोग इसे ‘चुप्पी की हवेली’ कहते हैं, क्योंकि जो भी वहाँ रात बिताने की कोशिश करता है, वह या तो पागल होकर लौटता है या फिर कभी लौटता ही नहीं।

आर्यन्वर राठौर, एक सफल आर्किटेक्ट, दिल्ली की चकाचौंध भरी जिंदगी में व्यस्त था। उसने कभी अपनी जड़ों की परवाह नहीं की। लेकिन एक अप्रत्याशित फोन कॉल ने सब बदल दिया। उसके दादा, रणविजय राठौर, की अचानक मृत्यु हो गई और वसीयत के अनुसार हवेली और उससे जुड़ी सारी संपत्ति अब उसी को विरासत में मिली थी। आर्यन्वर ने फैसला किया कि वह हवेली को बेचकर वापस लौट आएगा। बस दो-तीन दिन का काम।

जब वह कालपी पहुँचा, तो शाम ढल चुकी थी। घने कोहरे में डूबी सड़कें, पुरानी बरगद के पेड़ जिनकी जड़ें सड़क को तोड़ रही थीं, और दूर से दिखती हुई हवेली की काली छाया — सब कुछ उसे असहज कर रहा था। हवेली की विशाल लोहे की गेट पर लगी जंग लगी ताला खोलते समय उसे लगा जैसे कोई उसे देख रहा हो। अंदर कदम रखते ही पुरानी लकड़ी की सीढ़ियों की चरमराहट, दीवारों से आने वाली नमी की गंध और कहीं दूर से आती हुई फुसफुसाहट ने उसे चौंका दिया।

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी थी। कोई कहता था कि १९४७ में यहाँ एक भयानक हत्या हुई थी, कोई कहता था कि राठौर परिवार पर कोई प्राचीन श्राप है जो हर तीन पीढ़ी में एक सदस्य को निगल जाता है। आर्यन्वर ने इन बातों को अंधविश्वास समझा और हवेली की मरम्मत शुरू करने का प्लान बनाया। लेकिन पहली ही रात उसे एक सपना आया — एक स्त्री की आकृति, जिसका चेहरा खून से सना था, बार-बार उसके नाम से पुकार रही थी।

जैसे-जैसे दिन बीतते गए, छोटी-छोटी घटनाएँ बढ़ने लगीं। रात में बंद कमरों से आने वाली बच्चों की हँसी, दीवारों पर अचानक दिखने वाले प्राचीन प्रतीक, पुरानी डायरी में लिखे हुए अनसुलझे राज़, और सबसे डरावनी बात — आर्यन्वर को महसूस होने लगा कि वह अकेला नहीं है। हवेली में कोई और भी है, जो उसे अपनी कहानी सुनाना चाहता है।

धीरे-धीरे आर्यन्वर को एहसास होता है कि उसकी अपनी जिंदगी भी इस हवेली से जुड़ी हुई है। उसके बचपन के कुछ दबे हुए यादें, उसके परिवार के गुप्त पाप, और एक ऐसी शक्ति जो सदियों से इंतजार कर रही है। क्या यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक भ्रम है या वाकई कोई अधूरी आत्मा है जो न्याय मांग रही है? क्या आर्यन्वर इस हवेली का आखिरी शिकार बनेगा या वह इस श्राप को तोड़ने वाला अंतिम व्यक्ति होगा?
यह कहानी भय, रहस्य और मनोवैज्ञानिक गहराई का वो मिश्रण है जो पाठक को हर पन्ने के साथ और गहरे में खींचती चली जाती है।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top