माँ की मृत्यु के बाद forensic photographer ईशान वर्मा अपनी पत्नी काव्या के साथ अट्ठाईस साल पुराने पारिवारिक घर में लौटता है। पश्चिमी दीवार की वह दरार, जिसे वर्षों से बार-बार भरवाया गया, हर बार उसी जगह लौट आती है। पहली रात 2:13 बजे दरार के भीतर एक बूढ़ा चेहरा कहता है—दीवार मत तोड़ना। अगले ही पल वहीं काव्या का चेहरा उभरता है, आँखों से खून बहता हुआ, जबकि असली काव्या उसके पीछे बिल्कुल ठीक खड़ी होती है। दरार के पीछे कोई लाश नहीं है, कोई भूत नहीं, कोई दूसरी दुनिया का रास्ता नहीं। फिर भी उसके भीतर दिखने वाले चेहरे उन घटनाओं को पहले से जानते लगते हैं जो अभी हुई ही नहीं हैं—और हर बार सच भी नहीं निकलते। असली सवाल यह नहीं कि दीवार में कौन छिपा है। असली सवाल यह है कि अगर दीवार के पीछे कोई नहीं है, तो दरार समय से आगे कैसे देख लेती है।
All Chapters
- अध्याय 1 – दरार में छुपा चेहरा
- अध्याय 2 – तस्वीर में चेहरा क्यों नहीं आया?
- अध्याय 3 – काव्या के चेहरे पर वही निशान
- अध्याय 4 – वह बूढ़ा आदमी कौन था?
- अध्याय 5 – माँ भी चेहरे देखती थीं
- अध्याय 6 – रात 2:13 का सच
- अध्याय 7 – दीवार के पीछे क्या छिपा है?
- अध्याय 8 – शकुंतला देवी का नाम
- अध्याय 9 – उस रात कोई मरा नहीं था
- अध्याय 10 – भविष्य हमेशा सच नहीं होता
- अध्याय 11 – इसे बंद मत करना
- अध्याय 12 – दरार के उस पार
