उन्नीस साल बाद 35 वर्षीय low-light forensic imaging specialist कबीर अवस्थी अपनी माँ की मृत्यु के बाद पुश्तैनी घर लौटता है। बचपन में इसी घर में हुई एक रहस्यमय दुर्घटना के बाद उसके पिता की मृत्यु हुई थी और परिवार ने हमेशा कहा कि उस रात घटना का एकमात्र eyewitness कबीर था। लेकिन घर लौटने की पहली रात बिजली जाते ही उसे अंधेरे में चार आँखें दिखाई देती हैं—दो किसी अनजान आदमी की और दो बिल्कुल उसकी अपनी। अगले दिन उसे 19 साल पुरानी police file में एक ऐसा वाक्य मिलता है जो उसकी पूरी childhood memory बदल देता है: “घटना के समय कमरे में दो प्रत्यक्षदर्शी मौजूद थे।” Official copy में दूसरे witness का नाम काट दिया गया है।
All Chapters
- अध्याय 1 – अंधेरे में चार आँखें
- अध्याय 2 – उनमें से दो आँखें मेरी थीं
- अध्याय 3 – उस रात एक नहीं, दो गवाह थे
- अध्याय 4 – दूसरे गवाह का नाम क्यों मिटाया गया?
- अध्याय 5 – अर्जुन उस रात घर में था
- अध्याय 6 – तस्वीर के अंधेरे में तीसरा आदमी
- अध्याय 7 – आईने ने मेरी आँखें दो बार दिखाईं
- अध्याय 8 – पापा ने मुझसे नहीं कहा था—पीछे मत देखना
- अध्याय 9 – अर्जुन ने क्या देखा था?
- अध्याय 10 – पापा को धक्का नहीं दिया गया था
- अध्याय 11 – उन्होंने आख़िरी बार किसी को बचाया था
- अध्याय 12 – अंधेरा फिर हुआ
