शादी के तीन वर्ष बाद तीस वर्षीय अनुष्का मल्होत्रा अपने पति रुद्र के साथ एक शांत पहाड़ी कस्बे के पुराने घर में रहने आती है। कुछ ही रातों बाद रुद्र खुद देखता है कि ठीक 3:17 बजे अनुष्का की आँखें खुल जाती हैं—सिर स्थिर, पलकें बिना झपके, जैसे वह दरवाज़े पर खड़े किसी को देख रही हो। सुबह उसे कुछ याद नहीं रहता। डॉक्टर इसे नींद से जुड़ी एक संभावित अवस्था मानते हैं। लेकिन bedroom camera बाद की एक रात कुछ और रिकॉर्ड करता है: उसकी आँखें खुलने से कुछ सेकंड पहले बंद दरवाज़ा भीतर की ओर दबता है। और एक दूसरी recording में उसकी आँखें पूरे समय बंद रहती हैं, फिर भी कोने की खाली कुर्सी धीरे-धीरे बिस्तर की ओर घूम जाती है। अगली सुबह तकिए के नीचे उसकी अपनी handwriting में एक पन्नी मिलती है—“आज रात मेरी आँखें खुलें तो मुझे मत जगाना। वह अभी मुझे पहचानता नहीं है।”
All Chapters
- अध्याय 1 – रात में खुली आँखें
- अध्याय 2 – मुझे मत जगाना
- अध्याय 3 – खाली कुर्सी पर कौन बैठा था?
- अध्याय 4 – रात 3:17 का रहस्य
- अध्याय 5 – इस घर में कोई देख रहा था
- अध्याय 6 – नैना की डायरी
- अध्याय 7 – रुद्र ने सच क्यों छिपाया?
- अध्याय 8 – बंद कमरे की तस्वीर
- अध्याय 9 – रात में घर के अंदर कौन आया?
- अध्याय 10 – खुली आँखों का सच
- अध्याय 11 – जो देख रहा था
- अध्याय 12 – आँखें बंद मत करना
