शादी के सात साल बाद पहली बार अनन्या का करवा चौथ उसके पति के बिना बीतने वाला था। उसका पति विराज एक सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। डॉक्टरों ने परिवार को कठिन समय के लिए तैयार रहने को कहा था। उसी रात अनन्या को अपनी दिवंगत सास की पुरानी पूजा की थाली में एक चिट्ठी मिली, जिस पर लिखा था—“जब तुम्हें लगे कि तुम्हारी प्रार्थना सुनने वाला कोई नहीं, तब इस चिट्ठी को पढ़ना।” चिट्ठी में एक अधूरी करवा चौथ कथा, एक माँ की अंतिम इच्छा और एक ऐसा रहस्य था जो अनन्या के प्रेम, विश्वास और जीवन को हमेशा के लिए बदलने वाला था।
All Chapters
- अध्याय 1 – चाँद से पहले अँधेरा
- अध्याय 2 – अधूरी सरगी
- अध्याय 3 – सात साल का साथ
- अध्याय 4 – माँ की पुरानी चिट्ठी
- अध्याय 5 – करवा माता की कथा
- अध्याय 6 – वह रास्ता जो घर नहीं जाता था
- अध्याय 7 – सावित्री की अधूरी प्रार्थना
- अध्याय 8 – माँ का आखिरी वादा
- अध्याय 9 – विश्वास की सबसे कठिन रात
- अध्याय 10 – चाँद निकला है
- अध्याय 11 – माँ का आशीर्वाद
- अध्याय 12 – अगला करवा चौथ
