खोई हुई घड़ी

खोई हुई घड़ी
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काल्पनिक शहर कालेश्वर कभी अपने विशाल railway junction के लिए प्रसिद्ध था।
शहर का पुराना स्टेशन 1924 में बनाया गया था।
एक स्थानीय कहानी के अनुसार…
स्टेशन के पहले station master हरिनारायण देवधर के पास एक विशेष pocket watch थी।
वह दावा करता था—
“मेरी घड़ी ट्रेन का समय नहीं बताती।
वह बताती है कि किसका समय खत्म होने वाला है।”
लोग उसे पागल समझते थे।
फिर 1931 में…
एक रात उसने station diary में सात अलग-अलग समय लिखे।
अगले दिन एक रेल दुर्घटना हुई।
सात लोगों की मौत हुई।
Records के अनुसार…
हर व्यक्ति की मृत्यु उन्हीं सात समयों में से एक पर हुई।
उस घटना के बाद हरिनारायण गायब हो गया।
घड़ी भी।
लगभग एक शताब्दी बाद…
वही घड़ी स्टेशन की दीवार के अंदर मिलती है।
और संयोग से…
उसे restore करने वाली वामिका का surname भी है—
देवधर।
वामिका को पता चलता है—
हरिनारायण कोई अजनबी नहीं था।
वह उसके परिवार का पूर्वज था।
और देवधर परिवार में पीढ़ियों से एक कहानी छिपाई गई थी—
“अगर घड़ी वापस आए…
उसे चलने मत देना।”
लेकिन घड़ी पहले ही चल चुकी है।

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