अपनी माँ नसीमा की मृत्यु के बाद 32 वर्षीय investigative audio-journalist आदिल खान उसकी अंतिम इच्छा पूरी करने शहर के 140 वर्ष पुराने कब्रिस्तान पहुँचता है, जिसका पुराना हिस्सा अगली सुबह हमेशा के लिए बंद होने वाला है। नसीमा द्वारा छोड़े गए envelope में आदिल को अपनी बड़ी बहन समीरा की कब्र की photograph मिलती है और पीछे लिखा होता है—“Caretaker से पूछना, इसमें वास्तव में कौन दफन है।” परिवार के अनुसार समीरा की मृत्यु 2001 में बारह वर्ष की उम्र में हुई थी। लेकिन कब्रिस्तान का बूढ़ा caretaker यूसुफ record देखकर कहता है कि उस नाम की कोई बच्ची वहाँ कभी दफन ही नहीं हुई। उसी रात 1:13 बजे एक बेनाम कब्र के पास bell बजती है और अंधेरे से एक लड़की की आवाज़ आदिल का नाम लेकर कहती है—“मेरी कब्र गलत है।”
All Chapters
- अध्याय 1 – कब्रिस्तान की आख़िरी रात
- अध्याय 2 – इस कब्र में समीरा नहीं है
- अध्याय 3 – रात 1:13 की घंटी
- अध्याय 4 – नीला दुपट्टा किसका था?
- अध्याय 5 – कब्र पर नाम बाद में लिखा गया था
- अध्याय 6 – उस रात एक बच्ची जिंदा मिली थी
- अध्याय 7 – अम्मी अठारह साल पहले यहाँ क्यों आई थीं?
- अध्याय 8 – समीरा को दूसरे अस्पताल भेजा गया था
- अध्याय 9 – मेरी बहन 2001 में नहीं मरी थी
- अध्याय 10 – वह सात साल पहले मरी थी
- अध्याय 11 – उसकी जिंदगी कब्र के बाद भी थी
- अध्याय 12 – आख़िरी कब्र पर कोई नाम नहीं था
